चेतना की शक्ति

जिस पल को हम जीवन प्रदान कर रहे है, वह पल कैसे असफल हो सकता है सफलता की सारी संभावना जीवतंता में निहित है जिस क्षण हम असफलता के विषाद से भरे होते है वह क्षण हमरे मन के आँगन में असफलता का दूषित दुर्गन्ध आहार-विहार कर रहा होता है और हमारी चेतना भयंकर तरीके से द्वन्द जाल में फसकर क्षण क्षण हिनता का शिकार होता रहता है यह हिन् भावना हमारे उत्कृष्ट प्रदर्शन के नाव में एक तरह से छिद्र करता रहता है यधपि उसपर लगाम न लगाया जाए तो असफलता निश्चित रूप से अपना परचम लहरा लेगा .

 यहाँ सर्वाधिक महत्व सकर्त्मक उर्जा के वृद्धि करने वाले तत्वों को देना है. आज जो भी व्यक्ति असफलता की छाती पर चढ़कर अपने मन को नाचने-गाने का मौका दिया है उसने असफलता में सदैव शब्द को स्थान नहीं दिया है.

हम क्या है यह उतना मायने नहीं रखता जितना की हम क्या ही सकते है हम क्या कर सकते है यह मायने रखता है:-

मरोड़  दो  हर वो लब्ज को,

जो तेरे इरादे  को फोड़ता है

जोड़ दो हर वो नब्ज को

जो तुझे सफलता से जोड़ता है .


लेखक :- प्रभात कुमार