क्या सच में लालची होना बुरी बात है ? आपकी सोच बदल जाएगी इसको पढ़ने के बाद

लालच

चाहत का ही दूसरा नाम है. चाहत ही आगे चलकर लालच बन जाती है. जब किसी चीज को पाने की चाहत जरूरत से ज्यादा उत्प्रेरक बन जाए. तो लालच का जन्म होता है.और चाहते किस मनुष्य के पास नहीं होती. इसलिए देखा जाए तो दुनिया का हर मनुष्य लालची है. थोड़ा बहुत लालच सब में होता है, क्योंकि यह मनुष्य की प्रकृति होती है, किसी को पैसे की लालच तो किसी को घर का, किसी को ज्ञान का, तो किसी को संतान का, जैसे कोई दंपति एक बेटे की लालच में चार पांच या उससे भी अधिक संतानों को जन्म देता है, जिनकी जिम्मेदारी का बोझ उठाने में वह स्वयं ही सक्षम नहीं होते.

लालच का सच

लालच का सच

लालच हमें क्रियाशील बनाता है

आज संपत्ति के लालच में भाई-भाई का दुश्मन बन बैठा है. जमीन के लालच में न जाने कितने की खून रोज बहाए जाते हैं. जैसे कश्मीर को ही ले लीजिए जिसके लिए एक देश दूसरे देश का दुश्मन बना हुआ है. तो ऐसे छोटे-छोटे सीमा विवाद तो हर घर में रोज होते हैं. पैसों के लालच में लोग आतंकी बन जाते हैं. भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलने लगते हैं. लेकिन इन सभी बातों से यह तो तय है, कि लालच हमें क्रियाशील बनाता है. लालच में आकर हम कुछ भी करने के लिए अग्रसर हो जाते हैं. इसलिए लालच का होना आवश्यक है क्योंकि लालच हमें मकसद देता है. कुछ करने के लिए उद्देश्य का होना आवश्यक है. जो हमें लालच देता है.

क्या साधु संत लोग भी करते हैं लालच ?

सब कहते हैं लालच केवल  साधु संत लोग ही नहीं करते लेकिन ऐसा नहीं है. उन्हें ईश्वर से मिलने का लालच होता है, तो वह किसी और वस्तु के बारे में नहीं सोचते क्योंकि उनको उनका लक्ष्य उद्देश्य पता होता है. आपने लोगों ने कहते सुना होगा कि लालच बुरी बला है. पर ऐसा नहीं है लालच के प्रतिरूप का तोड़-मरोड़ कर परिभाषित कर दिया गया है. अगर अपने लालच को संतृप्त करने के लिए. गलत तरीके अपना ले तो उसका फल बुरा ही होगा न. लालच की  कई किसमें होती है. जब हमारे मन के नगरी में बहुत ओच्छी और छिछली किस्म के लालच भ्रमण करने लगे. तो उसका फल बुरा होता है. क्योंकि इसके लिए मनुष्य किसी भी हद तक गिर सकता है. लेकिन इन सब से ऊपर उठकर किसी को शोहरत, प्रतिष्ठा पाने, नाम कमाने, का लालच होता है. तो वह समाज में अच्छे अच्छे कार्य करते हैं. अच्छी सोच रखते हैं, तो ऐसे लालच का फल अच्छा होता है. पर इन सब चीजों को तो आजकल लालच की किस्मों में रखा ही नहीं जाता पर यह सच है, :अगर नाम कमाने का लालच ना हो तो लिखने से मेरा वास्ता भी ना होता: